अब दो साल और: स्मार्ट मीटर लगाने की डेडलाइन बढ़ी
बिजली कम्पनियों ने ही दी दलील, अभी सभी जगह डिजीटल सिस्टम तैयार नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
भोपाल। विद्युत नियामक आयोग ने जहां पिछले दिनों बिजली कम्पनियों द्वारा लगाई गई दर वृद्धि की याचिकाओं की सुनवाई पूरी कर ली और जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी करेगा, जिसके चलते भोपाल सहित तीनों कम्पनियां संभवत: अप्रैल महीने से बिजली की दरों में इजाफा करेगी। वहीं आयोग ने स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता को लेकर अवश्य राहत दी और दो साल की समय सी मा बढ़ा दी। क्योंकि इन कम्पनियों ने ही यह दलील दी कि स्मार्ट मीटर के साथ पूरा डिजीटल सिस्टम रहता है और अभी ग्रामीण सहित कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर नेटवर्क की सुविधा नहीं है। लिहाजा 31 मार्च 2028 तक स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता की छूट दे दी है।
बिजली चोरी के अलावा पारेषण क्षति रोकने के लिए भी स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। हालांकि इससे बिजली कम्पनियों को तो फायदा मिल रहा, क्योंकि बिजली बिल बढ़ गए। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके मासिक बिल की राशि दो गुना तक हो गई है। वहीं पिछले दिनों शहरी क्षेत्र में तो बिजली कम्पनी स्मार्ट मीटर तेजी से लगा रही है, मगर अभी भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी पारम्परिक मीटर ही लगे हैं। अभी यह नियम था कि हर नए कनेक्शन के लिए स्मार्ट या प्रीपेड मीटर लगाना जरूरी होगा। मगर दूर दराज के गांवों में नेटवर्क, तकनीक के साथ उपकरणों की कमी के चलते भी नए कनेक्शन देने में समस्या आ रही है। लिहाजा इन कम्पनियों ने ही आयोग को बताया कि स्मार्ट मीटर के साथ पूरा डिजीटल सिस्टम काम करता है, जिसमें सर्वर, नेटवर्क कनेक्टीविटी, बिलिंग इंटीग्रेशन सहित अन्य सुविधाएं रहती है। इसके बिना स्मार्ट मीटर काम नहीं करता। लिहाजा अब आयोग ने इन कम्पनियों को यह अनुमति दी कि वह 31 मार्च 2028 तक छूट दे सकती है और ग्रामीण तथा पिछड़े क्षेत्रों में परम्परागत मीटर के साथ नए कनेक्शन दे। दूसरी तरफ अटल गृह ज्योति योजना में उपभोक्ताओं को अच्छी-खासी सब्सिडी दी जाती है।

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