आंध्र प्रदेश में ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, तस्करों के नेटवर्क का खुलासा
विजयवाड़ा। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने आंध्र प्रदेश के एनटीआर जिले के कोंडापल्ली इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया में एक गुप्त संयंत्र पकड़ा है, जो अलप्राज़ोलम का उत्पादन कर रहा था। यह एक साइकोट्रॉपिक पदार्थ है, जिसे नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत नियंत्रित किया जाता है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि छापेमारी के दौरान 237 किलोग्राम अलप्राज़ोलम जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग 47 करोड़ रुपए है। इस खुफिया आधारित अभियान को “ऑपरेशन व्हाइट हैमर” का कोड नाम दिया गया था। इस अभियान में एक पूरी तरह से कार्यशील औद्योगिक सेटअप का खुलासा हुआ, जो कथित तौर पर अलप्राज़ोलम का उत्पादन कर रहा था और इसे रासायनिक निर्माण इकाई के आड़ में छिपाया गया था। मंत्रालय ने यह भी बताया कि अधिकारियों ने 800 किलोग्राम से अधिक प्रमुख कच्चा माल, 2,860 लीटर विभिन्न रसायन और औद्योगिक उपकरण जैसे रिएक्टर, ड्रायर और सेंट्रीफ्यूज जब्त किए, जो एक संगठित और बड़े पैमाने पर गुप्त दवा निर्माण संयंत्र की मौजूदगी को दर्शाते हैं। प्रारंभिक जांच से पता चला कि यह ऑपरेशन कथित तौर पर रसायन और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में 20 साल से अधिक अनुभव वाले एक रसायनज्ञ द्वारा संचालित किया गया था। यह व्यक्ति हैदराबाद में कच्चा माल उपलब्ध कराने और वितरण नेटवर्क संभालने वाले सहयोगी के साथ मिलकर काम कर रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने अवैध अलप्राज़ोलम उत्पादन के लिए फैक्ट्री परिसर किराए पर लिया था। दोनों कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान डीआरआई ने खुफिया-आधारित अभियानों के माध्यम से आठ गुप्त दवा निर्माण इकाइयों को ध्वस्त किया, जो सरकार के नशामुक्त भारत अभियान और समाज व लोगों को नार्कोटिक और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के खतरे से सुरक्षित रखने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे पहले फरवरी में असम राइफल्स और डीआरआई ने संयुक्त अभियान में अत्यधिक नशे की लत वाले मेथामफेटामाइन टैबलेट्स जब्त किए थे, जिनकी कीमत 45 करोड़ रुपए से अधिक थी और त्रिपुरा में एक ड्रग पैडलर को गिरफ्तार किया था।

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