एक नजर में सिंहस्थ और कुंभ का अंतर, समुद्र मंथन में निकले अमृत और वासुकी नाग की पूरी कहानी
उज्जैन : महाराष्ट्र के नासिक त्र्यंबकेश्वर में कुंभ की तारीखों के एलान के बाद अब महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की अवंतिका नगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. तीर्थ नगरी नासिक, हरिद्वार, उज्जैन एवं प्रयागराज में लगने वाले कुंभ और सिंहस्थ महापर्व को लेकर सिंहस्थ के महत्व, कैसे निकलती है इनकी तारीखें, क्या सब जगह 12 वर्ष में आता है ये महापर्व? 2028 में उज्जैन का सिंहस्थ कब शुरू होगा? कितने महीनों का ये पर्व होता है?
नहान की तारीखें कैसे तय होती है, हर एक बात की जानकारी विश्व विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास, ज्योतिषि पंडित अमर डब्बेवाला व श्रीमहाकालेश्वर मंदिर के महेश पुजारी जो अखील भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, उनसे ली. सभी से चर्चा के दौरान बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई. आइए जानते है वो तमाम जानकारियां...
कहां किस राशि का प्रवेश!
विश्व विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास के अनुसार "उज्जैन में वैशाख मास में गुरु सिंह राशि में प्रवेश करते है. सिंह का गुरु होने से सिंहस्थ कुंभ कहलाता है. नासिक में कुंभ श्रावण मास में लगता है. यहां भी गुरु सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, सिंह का गुरु होने से इसे भी सिंहस्थ कुंभ कहते हैं. नासिक और उज्जैन के कुम्भ या कहें सिंहस्थ में बस 6 माह का अंतर होता है. नासिक में कुंभ के 6 माह बाद उज्जैन का कुंभ शुरू होगा और ऐसा हर 12 साल में गुरु का चक्र पूरा होने पर होता है.
जैसे आगामी 2027 में श्रावण महीने में नासिक का सिंहस्थ है. उसके 6 महीने बाद 2028 में वैशाख महीने में उज्जैन का सिंहस्थ शुरू हो जाएगा. तीसरा हरिद्वार में जब कुंभ लगता है, तब फाल्गुन मास से वैशाख मास तक 1 माह का पर्व होता है. यहां गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं और प्रयागराज में गुरु वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं. यहां माघ मास में कुंभ महापर्व होता है. सभी जगह तिथि अनुसार ये पर्व 1 मास के होते हैं.

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